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मध्य प्रदेश


चारों ओर फैले पर्वतों में से विंध्य और सतपुडा पर्वतों के मिलन स्थल पर 1065 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं, अमरकंटक हिंदुओं के लिये एक पवित्र तीर्थ स्थल हैं और सोन नदी का उदगम स्थल हैं। नर्मदा अमरकंटक से पश्चिम की ओर बहती है जबकि सोन पूर्व की ओर। नर्मदा वास्तव में प्रकृति का वरदान हैं। पवित्र तालाब ऊंचे पर्वत,चारों ओर वन,मनोहारी सुंदर जलप्रपात और व्यापक हवाएं अमरकंटक को निर्मल बनाती है जो धार्मिक विचारधारा वाले प्रकृति प्रेमियों को दूर से खींच लाती है।

भारत के सभी पवित्र नदियों में से नर्मदा एक विशिष्ठ स्थान रखती हैं। मान्यता यह है कि भगवान शंकर ने पवित्र करने की शक्ति नर्मदा को दी है। जहां समर्पण करने वाले को पवित्र गंगा में डुबकी लगाने पर,यमुना के तट पर सात दिनों तक प्रार्थना करने पर और सरस्वती के किनारे तीन दिनों तक प्रार्थना करने मोहक लोक कथा है कि नर्मदा के दर्शन मात्र से हो जाते हैं। एक होने पर अपनी शुद्धिकरण के लिए मैली महिला का वेश धारण कर अपने आपको नर्मदाजी में शुद्ध करती हैं।

अन्य नदियों का भी साहित्य एवं इतिहास में प्रत्येक की लोकप्रियता,रोमानी और जीवंतता का वर्णन है परन्तु नर्मदा का रहस्य दूसरे से भिन्न है। 
बांधवगढ़
यह एक छोटा राष्ट्रीय उद्यान है तथापि यह मनोंरंजन से भरा हुआ है।भारत में बाघों की सबसे अधिक संख्या बांधवगढ में पाई जाती है।देश के सफेद बाघ भी यहीं है। यह कई वर्षों से रींवा के पुराने जिले में पाया गया है । पिछली बार वर्ष 1951 में महाराज मारतंडसिं द्वारा पकडा गया था। यह सफेद बाघ दुर्लभ है और यह रींवा के महाराज के राजमहल में रखा गया है।

राष्ट्रीय उद्यान बनने से पहले बांधवगढ चारों ओर जंगलों से घिरा थाइन जंगलों का इस्तेमाल रींवा के महाराज शिकार या मनोरंजन के लिए किया जाता थे।महाराज और उनके मेहमान यहॉ शिकार करने आते थे, अन्यथा वन्य प्राणी यहॉ पूरी तरह संरक्षित थे। रींवा के महाराज दा्रा 109 बाघों का शिकार करना एक अच्छा शगुन माना जाता था। सन् 1914 में महामहिम महाधिराज वेंकटरमन सिंह दा्रा 111 बाघों का शिकार किया गया। 

भेड़ाघाट

नर्मदा के दोनों ओर 100 फीट ऊंची संगमरमर की चमचमाती चट्टाने भेडाघाट के गौरव को महिमा मंडित करती है। सफेद संगमरमर की चोटी पर पडतीचमचमाती सूरज की किरणें और निर्मल जल पर चितकबरीछाया बिखेरती हुई दृश्य शांत,स्नेहिल और निश्चलता की एक प्रतिमूर्ति है। काले और गहरे हरे ज्वालामुखी की परतों को निहारने से ये चट्टाने वास्तव में तेजस्वी लगती हैं और चॉदनी रात में अपना जादू बिखेरती है।
 
यह पवित्र नदी शांत भाव से आगे बढते हुए खडी चट्टानों के बीच निरंतर प्रवाहित होती हैं जो प्रकृति के बदलते हुए स्वरूप को आइने के रूप में प्रतिबिंबित करती है। यहॉ से थोडी ही दूर पर नर्मदा की धाराएं प्रबल वेग से गिरती हुई एक जलप्रपात का निर्माण करती है,जिसे धुंआधार के नाम से जाना जाता है।

केप्टन जे.फ्रोस्थ ने अपनी पुस्तक हाईलेड्स ऑफ सेट्रल इंडिया में चट्टानों के अदभुत सौदर्य का वर्णन करते हुए लिखा है कि "इस दृश्य को देखते हुए ऑखें कभी नहीं थकती... सूर्य की विखंडित किरणें खुले नीलेआकाश से परावर्तित होकर आ रही है,सफेद दूधिया चमचमाते संगमरमर की चोटी से परावर्तित होकर शुभ्र किरणें आसपास की चट्टानों से टकराती हुई मानों जल में विलीन होती है। आसपास स्थित लाइम स्टोन हरी और काली चट्टानों के बीच एक संधि रेखा का निर्माण करती है जिससे उत्पन्न विषमता जेट सा प्रतीत होती है।
 
कान्हा

कान्हा साल और बांसों का जंगल हैं, वैभवशाली प्राकृतिक सौंदर्यता की प्रतिमूर्ति 1940 वर्ग कि.मी. (क्षेत्र में साल और बांस के जंगलों से भरी हुई घास की नागिन सी लहलहाती भूमि से आच्छादित है जिसे सन् 1974 में बाघ परियोजना के अंतर्गत कान्हा टाइगर रिजर्व के रूप में बनाया गया । यही एक उद्यान है जिसमें दुर्लभ प्रजाति का बारहसिंगा पाया जाता है।(सर्व सदुवासिली ब्रांडेरी) उसने अपने जंगल बुक में जीवंत रूप में उल्लेख किया है कि यह किपलिंग का मूल देश है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में आज भी वन्य प्राणी की प्रजाति बहुतायत में पायी जाती है। ऐसी जगहों में हमें अवश्य जाना चाहिए । आपको याद होगा 'मोगली बच्चे' का प्रतिरूप था या बघीरा, काले बाघ का? और रूडयार्ड किपलिंग के जंगल बुक के खलनायक शेरखान को कौन भूल सकता है। वन्य प्राणियों के आश्चर्य जनक विविधता से भरी कान्हा का वैभवशाली वन का वर्णन अपनी यादगार पुस्तक में किया है।

पेन्च टाईगर रिसर्व - सिओनी

जंगल बुक में मशहूर किपलिंग देश एवं क्षेत्र के अनुसार मोगली की सच्ची भूमि पेंच टाइगर रिजर्व है। रूटयार्ड किपलिंग को सन् 1907 में उनके साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिये प्रथम नोबल पुरूस्कार से नवाजा गया था,जिसे जंगल बुक में शामिल किया गया है।वास्तव में यह मानव का बच्चा भेंडियों की तरह व्यवहार करता था। इसे बच्चे को लेफ्टीनेंट जॉन मूर के निर्देशन में कर्नल विलियम सेलेमन ने सन् 1831 में पकडा था। रूडयार्ड किपलिंग ने भेंडिये के समान व्यवहार करने वाले बच्चे विलियम सेलेमन और आर स्ट्रेंडल द्रारा लिखित "सिवनी के कैंप जीवन" पर लिखी पुस्तक से प्रेरणा ली थी। पेंच टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल 757 वर्ग कि.मी. हैं। पेंच राष्ट्रीय उद्यान और सेंचुरी का कोर एरिया 411 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैला हुआ है




Source : CMS Team Last Reviewed on: 24-05-2021  


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