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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ राज्य में विस्तारित संपूर्ण रेल्वे नेटवर्क दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के भौगोलिक परिक्षेत्र में आता है। भारत के हृदय स्थल पर स्थित इस राज्य की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और आकर्षण प्राकृतिक विभिन्नताएं हैं।

यह राज्य प्राचीन स्मारक, दुलर्भ वन्यप्राणी, आकर्षक नक्काशीदार मंदिर, बौद्धधर्म के तीर्थस्थल, महल, झरने, गुफाएं, पत्थरों पर चित्रकारी, पहाडी़ तथा पठारों से परिपूर्ण है। पर्यटकों के लिए छत्तीसगढ़ राज्य "पर्यटन का अलग अंदाज " उपलब्ध कराता है जो भीड़-भाड़ के पर्यटक स्थलों से उब गये है उनके लिए बस्तर एक अलग सांस्कृतिक एवं स्वस्थ पर्यावरण की पहचान देता है जिसे पर्यटक अपने आपको तरोताजा महसूस करते हैं। हरित प्रदेश छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत क्षेत्रवनों से ढका हुआ है तथा यह भारत के जैविक भिन्नता से परिपूर्ण क्षेत्रों में से एक है, जो भारत के जंगलों का 12 प्रतिशत हिस्सा है, छत्तीसगढ़ में तीन राष्ट्रीय उद्यान एवं 11 वन्य प्राणी संरक्षित स्थान है तथा राष्ट्रीय उद्यान उनके प्रमुख आकर्षण के केन्द्र है ।केंगर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बर्न वापरा, सितांडी, उदांटी और अचानकमार अभ्यारण्य जैसे संरक्षित स्थानों पर कई आकर्षक एवं मनमोहक (नयनाभिराम)दृश्य हैं।

पर्यटकों का स्वर्ग :- बस्तर


आदिवासियों एवं प्राकृतिक संपदाओं की भूमि जो प्राकृतिक सौंदर्य एवं मनोरम वातावरण से परिपूर्ण है। यह घने जंगलों, पहाड़ों, नदियों झरनों, प्राकृतिक गुफाओं, राष्ट्रीय उद्यानों इत्यादि से भरा हुआ है। यह क्षेत्र आदिवासी सभ्यता एवं उनकी धरोहर की पहचान रखता है, जो औद्यौगिकीकरण एवं नगरीकरण के मोहपाश में आये बिना अपनी पुरानी सभ्यता को तरो ताजा बनाए रखा है। प्राकृतिक सुंदरता के कारण बस्तर को "छत्तीसगढ़ का कश्मीर " के नाम से अंलकृत किया गया है।
घने जंगलों के मध्य बांस एवं झाड़ियों के बीच यहां सूर्य का प्रकाश भी पहुचना असंभव रहता है तथा घने एवं विस्तृत जंगलों के बीच जहां पर बहुमूल्य लकड़ी जैसे साल, सीसम, बीजा इत्यादि, उंचे पहाडों से गिरते हुए जलप्रपात , शीतल एवं मनोरम नदियां, घाटी के गुफाओं, उंचे झरनों एवं हरियाली के बीच बांस की लकड़ियों से बने झोपड़ी आदिवासियों की जीवन शैली की धैर्यता एवं उनकी सभ्यता की अलौकिक सौंदर्यता से हमारा मन और आत्मा खुशी से तृप्त हो जाती है।

 
न केवल बस्तर जिले में बल्कि बस्तर मंडल के निकटवर्ती जिले दंतेवाड़ा एवं कांकेर जिलों में भी कई रमणीय पर्यटक स्थल है। अक्सर यह सुना गया है कि ऐसे अन्य बहुत से देखने योग्य स्थान है जिन्हें अभी तक खोजा नही गया है। बस्तर पर्यटकों के मन एवं उनकी स्मृति में एक अमीट छाप छोडता है। बस्तर जिले के महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है - चित्रकूट एवं तीरथगढ़ कुतूमसार एवं कैलाश गुफाएं, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान जगदलपुर से 200 कि. मी. की दूरी पर स्थित है, यह शेर एवं जंगली भैंसों के लिए जाना जाता है । नारायणपुर के उत्तर पश्चिम में 40 कि.मी. की दूरी पर स्थित खुर्शेल घाटी एक अन्य पर्यटन स्थल है जिसमें घने एवं विशाल वृक्ष लगे हुए है ।


चित्रकोट


जगदलपुर के पश्चिम भाग पर 38 कि. मी. की दूरी पर इंद्रावती नदी का बहता सुहाना झरना चित्रकोट है। इस झरने का उंजाई तकरीबन 100 फीट है। चित्रकोट झरने को विश्व प्रसिद्ध नयाग्रा झरने का लघु रूप कह सकते हैं।

इस झरने की इंद्रधनुषी छटाएं पर्यटक को पहली नजर में ही आकर्षित कर लेती हैं। यह पर्यटकों के लिये जुलाई-अक्टूबर माह के वर्षा ऋतु में देखने योग्य है तथा यह उनके लिये मुख्य आकर्षण का केन्द्र है इस झरने की आकृति घोड़े की नाल की तरह है तथा अक्सर इसकी तुलना विश्व विख्यात नयाग्रा से की जाती है।

तीरथगढ़ जलप्रपात

जगदलपुर से दक्षिण पश्चिम दिशा से 35 कि. मी. की दूरी पर यह जलप्रपात स्थित है। यहां पर जगदलपुर से सुकमा के बीच राजकीय राजमार्ग से पहुंचा जा सकता है। वास्तव में यह जलप्रपात कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है तथा इसकी उंचाई लगभग 30 फीट है। यह स्थान पिकनिक के लिये लोकप्रिय है। खासतौर से जंगल में सामूहिक रूप से पूरा दिन बिताने वाले लोगो के लिये है। इन झरनों पर भ्रमण करने का उत्तम समय अक्टूबर से फरवरी के बीच है।

कुतुमसर गुफा और कैलाश गुफा

यह पर्यटकों के लिये बड़े ही आकर्षण का केन्द्र है और तीरथगढ़ झरने के निकट ही है। कुतुमसर गुफा और कैलाश गुफा केगर राष्ट्रीय उद्यान में स्थापित है तथा जगदलपुर से क्रमशः 38 कि. मी. तथा 40 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।




Source : CMS Team Last Reviewed on: 09-10-2020  


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